श्री द्वादश महेश्वराय धाम
विंध्याचल की पावन तपोभूमि, जहाँ आदिशक्ति विंध्यवासिनी की करुणा समस्त दिशाओं में आलोकित होती है, वहीं श्री द्वादश महेश्वराय मंदिर शिव के अनंत ज्योतिर्मय स्वरूप का अद्वितीय प्रतीक बनकर प्रतिष्ठित है। यह वह पावन धाम है जहाँ भारतवर्ष के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की दिव्य चेतना एक ही परिसर में साकार होकर श्रद्धालुओं को उस आध्यात्मिक अनुभूति से अभिसिंचित करती है, जिसे प्राप्त करने के लिए अन्यथा समस्त देश की तीर्थयात्रा करनी पड़ती।
इस भित्ति-चित्र में भारतीय पारंपरिक रेखांकन की शास्त्रीय गरिमा, सूक्ष्म अलंकरण, सममित विन्यास और अलंकृत सीमा-पट्टिका मंदिर-भित्ति कला की उत्कृष्ट परंपरा को साकार करते हैं। संपूर्ण संरचना में केंद्र और परिधि का संतुलन उस दिव्य दर्शन का बोध कराता है कि अनेक रूपों का मूल एक ही परम ज्योति है।
महेश्वर का शांत मुखमंडल
अग्रभाग में भगवान महेश्वर का शांत, समाधिस्थ मुखमंडल करुणा और अनंत चेतना से आलोकित है। जटाओं में प्रवाहित पावन गंगा, कंठ पर विराजमान नाग और ललाट पर प्रकाशित त्रिपुण्ड्र उनकी योगमयी महिमा का सजीव परिचय देते हैं। समीप प्रतिष्ठित शिवलिंग, नंदी और पूजा के पवित्र उपादान भक्तिभाव की मधुर लय रचते हैं।
अर्धवृत्त में आलोकित द्वादश स्वरूप
मध्यभाग में द्वादश ज्योतिर्लिंग — सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम् और घृष्णेश्वर — अर्धवृत्ताकार विन्यास में आलोकित हैं। प्रत्येक स्वरूप अपनी विशिष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए अंततः उसी एक परम महेश्वर में समाहित होता है।
प्रभा-किरणों का दिव्य विस्तार
पृष्ठभूमि में प्रभा-किरणों का दिव्य विस्तार सम्पूर्ण दृश्य को अलौकिक आयाम प्रदान करता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो शिव की ज्योति समस्त दिशाओं, पर्वतों और लोकों को आलोकित करती हुई विंध्यभूमि को कैलास की दिव्यता से जोड़ रही हो — वह अदृश्य ब्रह्मज्योति, जिसमें समस्त तीर्थ, समस्त साधना और समस्त सृष्टि एकाकार हो जाती है।
एक केंद्र, अखंड शिवचेतना
जब शिव के द्वादश प्रकाश एक ही केंद्र में प्रज्वलित होते हैं, तब साधक के लिए समस्त भारत एक मंदिर और समस्त तीर्थ एक ही परम ज्योति में समाहित हो जाते हैं।
श्री द्वादश महेश्वराय धाम उसी अखंड शिवचेतना का आलोक है,
जहाँ भक्ति, एकत्व और मोक्ष का मार्ग एक ही दिव्य प्रकाश में प्रकाशित होता है।
ॐ नमः शिवाय